इतिहास नया रचाऊं मै

इतिहास नया रचाऊं मैं !

पतझड़ों के पत्ते पर,
इतिहास नया रचाऊं मैं !
रूकूं नहीं मैं चलता जाऊं
ऐसी राह बनाऊं मैं !!
रंगीला कर दीं हर पल को
ऐसी तस्वीर बनाऊं मैं !
पतझड़ों के पत्ते पर,
इतिहास नया रचाऊं मै !!

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livepathshala इतिहास नया रचाऊं मै !!

 
निस्वार्थ भाव से काम करूं
ऐसी सपथ निभाऊं मैं
हासिल कर लूं हर मंजिल को
ऐसी लगन लगाऊं मैं
चुनौती दे हर पल इस युग को
ऐसा शंख बजाऊं मैं,,
पतझड़ों के पत्ते पर,
इतिहास नया रचाऊं मैं !!

 
ऊंची-निची राहों को
सही मोड़ दे जाऊं मैं
अंधकार की इस साजिश मैं
फिर से दीप जलाऊं मैं
रोशन रहे जो अंधकार मैं
ऐसा रत्न बनाऊं मैं,
पतझड़ों के पत्ते पर
इतिहास नया रचाऊं मैं !!

 

अमित साधना की शक्ति को
सार्थक यही बनाऊं मैं
वश में कर ले जो मन को
ऐसा मंत्र दोह राऊं मैं,,
पतझऊ़ों के पत्ते पर,
इतिहास नया रचाऊं मैं !!

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शुभम सिंह बिष्ट

We all thanks to शुभम सिंह बिष्ट  for sharing his poetry with LIVEPATHSHALA , and wishing him all the best wishes for his bright future.

 

 

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