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सफल शॉर्ट स्टोरी कैसे लिखें – बहुमूल्य सुझाव ।

सफल शॉर्ट स्टोरी कैसे लिखें – बहुमूल्य सुझाव ।

पिछले आर्टिकल में हमने जाना कि उपन्यास कैसे लिखें ?
आज इस आर्टिकल में हम ‘‘लघु कथा ‘‘ यानि कि शॉर्ट स्टोरी कैसे लिखें – के बारे में जानेगें।
शॉर्ट स्टोरी लिखने से पूर्व यह जानकारी होना अति आवश्यक है कि उपन्यास और शॉर्ट स्टोरी में क्या अंतर है ?
ज्यादातर हमें उपन्यास और शॉर्ट स्टोरी एक ही रूप में देखने को मिलती है। और आधुनिक युग में उपन्यास भी सचमुच शॉर्ट स्टोरी के रूप में ही प्रतीत होता है।

‘‘ उपन्यास हमें किसी व्यक्ति के जीवन या पात्र के संपूर्ण व्यौरे से हमें मुहैया कराता है। जबकि शॉर्ट स्टोरी ( लघु-कथा ) में पात्र अपने जीवन से जुड़ी किसी एक विशिष्ट घटना से परिचय करवाता है।‘‘
यही वह मुख्य अंतर है जो हमें उपन्यास और लघु कथा से अच्छी तरह पहचान कराता है।

तो आइये जानते हैं कि बेहतर शॉर्ट-स्टोरी कैसे लिखें ?

short story

 

1. मस्तिष्क में शॉर्ट-स्टोरी का ढांचा तैयार करें –

इसके लिए जरूरी है कि पहले आप ज्यादा से ज्यादा लघु कथाओं का अध्ययन कर लें।   प्रत्येक लघु कथा से उसका रूप चुराकर अपने मस्तिष्क में तैयार करें,  और फिर स्वयं की कहानी का रूपांतरण कल्पना की सहायता से दें।
यह महसूस करें कि आप अपनी कहानी को किस रूप या ढांचे में तैयार करना चाहते है।
खुद की कहानी को पूर्ण रूप में अनुभूति कर यह सोचें कि आप किस रूप में उस कहानी को लिखने का प्रयत्न करना चाहते हैं।

 

 

2. शॉर्ट स्टोरी की प्रस्तावना – 

लघु कथाओं में प्रस्तावना अह्म भूमिका निभाने का कार्य करती है। प्रस्तावना में ज्यादातर हम अपने पात्र की विशिष्टताओं या पात्र को पाठकों से परिचय करवाते हैं।

यहाँ यह भी ध्यान रखने योग्य बात है कि प्रस्तावना लिखते समय या पहला पैराग्राफ लिखते समय हमें साहित्यिक शब्दों, चिन्हों तथा भाषा का अच्छा ज्ञान होना चाहिए।
शॉर्ट स्टोरी में कभी भी भाषा-शैली का फेर-बदल नहीं किया जाना चाहिए। भाषा-शैली ही वह आकर्शण का केन्द्र हैं जो पाठकों को आपकी लघु-कथा के साथ बांधकर रखेगा।

इसलिए भाषा-शैली में जरा-सा फेर-बदल आपकी बेहतर कहानी को घटिया रूप दे सकता है।

 

 

3. शॉर्ट स्टोरी के पात्र की रचना-

प्रस्तावना के साथ ही आप अपने पात्र की संभावित रचना कीजिए।

यहाँ ध्यान रखने योग्य बात यह है कि पात्र हमेशा मुसीबतों से गुजरता हुआ अपने उद्देश्य प्राप्ति की ओर अग्रसारित होता हुआ होना चाहिए।
पिछले आर्टिकल में उपन्यास कैसे लिखें ?  में भी हमने यही बात दोहरायी जो कि कहानी के लिए अह्म भूमिका निभाती है।
पाठकों को मुसीबतों से लड़ने वाला ताकतवर किंतु सत्य प्रतीत होता हुआ पात्र बेहद पसंद होता है।
यदि आप किसी लघु कथा में कोई भी बात पात्र के माध्यम से दोहराना चाहते हैं तो यहाँ इस बात का विशेषतः ध्यान रखें कि पात्र पाठकों को सत्य प्रतीत होने वाली घटनाओं का ही मार्गदर्शन कराये। यह लोगों को अत्यधिक प्रभावित करता है।

 

 

4. शॉर्ट स्टोरी के पात्र की भूमिका –

कहीं ऐसा न हो कि आपने अपने पात्र को बेहतर बना तो दिया है ।  किंतु उसे और अधिक बेहतर बनाने के चक्कर में आप पात्र को उसके प्रधान लक्ष्य से परे धकेल रहे हों।

ध्यान रखें पात्र को उसके प्रधान लक्ष्य से न भटकायें।

 

 

5.  शॉर्ट स्टोरी में कथाकार का चयन ध्यान से करें –

यह विशेष सर्वोपरि बात है कि आपकी कहानी को कहने वाला यानि कि कहानी को पाठकों से भेंट कराने वाला कौन है ?

उसके बाद ही कहानी लिखना प्रारंभ करें।

कहानी को तीन रूपों में लिखते हुये कथाकार का चुनाव कर सकते हैं।
1 स्वयं पात्र – प्रथम पुरुष
2 आप लेखक – द्वितीय पुरुष
3 किसी अन्य ( वह ) कथाकार का प्रयोग कर – तृतीय पुरुष ।

 

 

6.  शॉर्ट स्टोरी में प्रेरणायें-

प्रेरणाओं का भी चयन करना पात्र को बेहतर निखारने का उपचार है।

आप प्रेरणाओं का संकल्प मुख्य पात्र के लिए सात्विक दुनिया के उदाहरणों या रियल लाइफ में होने वाली घटनाओं का चयन भी कर सकते हैं।

शॉर्ट स्टोरी का अक्सर उद्देश्य ही, प्रेरणा देना होता है, इसलिए अपने मुख्य पात्र व कथाकार के माध्यम से प्रेरणा दें।

 

 

7.  शॉर्ट स्टोरी में पार्श्व दुश्य-

पार्श्व दृश्य या बैकग्राउंड थीम की बात करें तो ज्यादातर थीम रियल लाइफ पर आधारित हो तो ज्यादा अच्छा है।

कल्पना को यथार्थ का स्वरूप दें और पाठकों का आकर्षण ज्यादा से ज्यादा इकट्ठा करें।

 

8.  शॉर्ट स्टोरी का उपसंहार –

प्रत्येक कहानी को लिखते वक्त उपसंहार वह पड़ाव है जिसका पाठकों को उसके पात्र के मुख्य लक्ष्य, की प्राप्ति होती है।

अर्थात् उस उद्देश्य को संपूर्णता दी जाती है जसके लिए कहानी का आरंभ हुआ । इसलिए कहानी का उपसंहार अत्यधिक आकर्षक और रोमांचकारी होना चाहिए।

 

 

9.  शॉर्ट स्टारी को लिखने के बाद पढ़े और पढ़ायें –

कहानी को पूरा लिख लेने के बाद खुद पढ़े और छोटी-बड़ी गलतियों व चूक शब्दों को सुधारकर लिखें।
तत्पश्चात् अपनी कहानी को किसी मित्र या संबंधी को पढ़ने के लिए अवश्य दें व कहानी पर टिप्पणी इकट्ठी करें।

10.  शॉर्ट स्टोरी में कहानी के आकार का ध्यान रखें-

इन बिंदुओं में सबसे अधिक जो बात ध्यान रखने योग्य है वह है- आपकी कहानी का आकार ।

हमेशा कहानी का आकार संक्षिप्त ही रहे अन्यथा यह कहानी लघु कथा नहीं उपन्यास में तब्दील हो सकती है।

 

11.  शॉर्ट स्टोरी लिखना प्रारंभ करें-

सारी बातों को ध्यान में रखते हुये प्रस्तावना का सही चुनाव, पात्र की रचना, अटकलों व मुसीबतों की सीमाओं में घिरा पात्र तथा पात्र की भूमिका, आप लिखना आरंभ कर सकते हैं।

प्रस्तावना में पात्र का परिचय और उसकी सीमाओं का बंधन अवश्य दर्शायें ।

 

अगर आप इस लेख में बताये गये बिन्दुओं को ध्यान में रखकर एक शॉर्ट स्टोरी लिखते हैं । तब आप एक शॉर्ट स्टोरी की सफलता पूर्वक रचना कर सकते हैं, व खुद को एक सफल कहानीकार के रूप में दुनिया के सामने ला सकते हो।

written by piyush tiwari       Piyush Ashok Tiwari

 

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