bhagwati prashad

आँसू मिले उन्हें भी स्वर दो…भगवती प्रसाद कुलश्रेष्ठ

आँसू मिले उन्हें भी स्वर दो
खुशियां मिले उन्हें भी गाओ
कवि यूं अपना धर्म निभाओ ।
bhagwati prashad
 
जीवन जीना सहज नहीं है,
मिलते हैं पग-पग पर कांटे।
ऐसे स्वजन बहुत दुर्लभ हैं,
जो बढ़कर पीड़ा को बांटे।
 
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हार मिले तो उसको स्वर दो,
मिले जीत तो उसको गाओ,
कवि यूं अपना धर्म निभाओ ।
 
सागर अपने में सागर है,
नहीं किसी की प्यास बुझाता।
प्यास बुझाने को पनघट है,
जीवन से है जिसका नाता।
 
प्यास मिले तो उसको स्वर दो,
मिले तृप्ति तो उसको गाओ,
कवि यूं अपना धर्म निभाओ ।
 
प्यार अगर हो तो ऐसा हो,
जो बन जाए एक कहानी।
नहीं मिटाने पर मिट पाये,
जिसकी जग में अमिट निशानी ।
 
विरह मिले तो उसको स्वर दो
हो संयोग उसे भी गाओ।
कवि यूं अपना धर्म निभाओ ।
 
भूख प्यास यदि मिले देखने ,
तो उसकी पीड़ा को जानो ।
हिंसा अरु आतंकबाद की,
निर्दयता को भी पहचानो।
 
पतझड़ मिले तो उसे भी स्वर दो,
हो बहार तो उसको गाओ।
कवि यूं अपना धर्म निभाओ ।

Written by

bhagwati murena   भगवती प्रसाद कुलश्रेष्ठ  

 

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