ये कैसी क़यामत आई है

ये कैसी क़यामत आई है
लोटा बचपन एक नई जवानी आई है
अनजाने है लोग यहाँ
ये कैसी क़यामत आई है

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angel

लोटा बचपन एक नई जवानी आई है
अनजाने है लोग यहाँ पर
ये केसा सिलसिला लाई है
ये कैसी क़यामत आई है….

अजनबी है दुनिया यहाँ
बेगानी सी राहे यहाँ
अलबेलो के मेलो से
ये कैसी शिकायत आई है
ये कैसी क़यामत आई है…

दर्द भरे आलम में
अपने ही के दामन में
कैसी तूफ़ान सी आई है
होता नही यहाँ कोई किसी का
सपनो में भी पंख लगाकर लाई है
ये कैसी क़यामत आई है..

नए नए सितारे यहाँ पर
कोई नया चाँद भी लाई है
आजादी के उस आँगन ने
नई सुबह सी पाई है
ये केसी क़यामत आई है…

सफ़र है यहाँ का दो कदम सा
ये केसा शौर सा लाई है
बढे कदम जब उस सफ़र में
एक नई सोच सी आई है
ये केसी क़यामत आई है…!

 

Written by IMG-20160717-WA0006 Deepesh Kumar Sharma Deepesh Kumar Sharma is a writer (relative to natural lusture) he is persueing B.Sc. (computer science) from P.M.B.Gujrati Science College Indore (M.P.).

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