ये कैसा आया है मौसम

ये कैसा आया है मौसम

बाग-बाग में बगियाँ भावे

ये कैसा आया है मौसम

झूम उठा है देखो मधुवन

अब तो भटक रहा है मन

जात-पात का जरिया छोडो

खुलकर और सभी से बोलो

एक तेरा मस्तानापन एक मेरा अन्जानापन..

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mousam 1

जैसे भोले को तो भावे भाँग-धतुरा

और चन्दन कृष्ण नाम तो पल-पल गावे

अब राधे-राधे करता मन

मिलकर चाँद गावे जैसे तारे सारे

और मेरा मन एक तेरा मस्तानापन एक मेरा अन्जानापन…..

writtten by          deepesh_converted                                                                                           Deepesh  Kumar  Sharma

Deepesh  Kumar  Sharma is  a  writer (relative to natural lusture)  he is persueing B.Sc. (computer science) from P.M.B.Gujrati Science College Indore (M.P.).  

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