बहती हवाओ से कुछ ऐसी आवाजे शोर मचाती है

बहती हवाओ से कुछ ऐसी आवाजे शोर मचाती है
मानो कोई नई फिजाए महकाती है
हर मजहब को बहकाती है
कुमुदनी भी अपनी हँसी छिपाती है
अपने अधरों में चंचलता दिखलाती है
सारे लम्हों का कोई मौसम बन जाता है
जब उन आवाजो का मतलब समझ आता है….

wind

हर राही के मन में हलचल मचवाती है
चलने वाला राही भी उसकी राहो को अमर बनाता है
दायरों को फिर अपने नजदीक लाता है
और फ़ासलों को फिर से वह जगाता है
सारे लम्हों का कोई मौसम बन जाता है
जब उन आवाजो का मतलब समझ आता है…

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ख़ामोशी से बहता पानी भी अपनी वीरानी की गाथा सुनाता है
पवन का एक झोका सा आता है
कुछ पलो की कशमकश सी लाता है
सारे लम्हों का कोई मौसम बन जाता है
जब उन आवाजो का मतलब समझ आता है…..

 

 

writtten by             deepesh_converted                                                                                        Deepesh  Kumar  Sharma

Deepesh  Kumar  Sharma is  a  writer (relative to natural lusture)  he is persueing B.Sc. (computer science) from P.M.B.Gujrati Science College Indore (M.P.).  

We  thanks to Deepesh  Kumar  Sharma   Ji for sharing his poetry with LIVEPATHSHALA , and wishing him all the best wishes for his bright future.

 

 

 

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