प्यार का साथी कौन होता है

प्यार का साथी कौन होता है ? 

एक बार सभी भावनायें पार्टी करने केे लिए एक द्वीप (island) पर गये हुयेे थे ।

तभी एक घोषणा हुुई कि उस द्वीप पर भयानक तूफान आने वाला हैै, वहाँ पर मौजूद सभी तुरंत वहाँ सेे चले जायें ।love-1
सभी तुरंत अपनी -अपनी नाव (boat) लेकर जाने लगेे ।

 

परंतु प्यार तो उस द्वीप की सुंदरता निहारने में मग्न था ।

वह उस द्वीप के फूलों को, वहाँ के दृश्यों आदि कोे देखकर खुश होे रहा था और उनमे ही खोया हुआ था ।

 

 

 

जब तूफान का प्रभाव बड़ने लगा और वहाँ के पेड़ -पौधे उखड़ने लगे।

वहाँ चारों ओर वस विनाश ही विनाश दिखने लगा और यह लगने लगा कि कुछ ही समय मेे वह द्वीप खत्म होने वाला है।love-2

तब प्यार को एहसास हुआ, वह दौड़कर अपनी नाव के पास पहुँचा, पर वह टूट चुकी थी ।

 

 

तभी उसे वहाँ क्रोध दिखा जो अपनी नाव लेकर वस जानेे ही वाला  था ।
‘‘ क्या तुम मुझेे अपने साथ ले जा सकते हो  ? ”

‘‘बिल्कुुल नहीं, तुम तो मेरेे सत्रु हो, यहाँ प्यार होता है, जिनके ह्रदय मेेे प्यार होता है , वहाँ क्रोध  यानि मेे नहीं हो सकता , इसलिए मेे तुम्हे अपनेे साथ नहीं लेेे जा सकता ” क्रोध ने गुस्सा करतेे हुये कहा ।
तभी प्यार को वहाँ घमंड दिखा और प्यार ने उसके नाव में बैठने के लिए विनती की पर,

नाक सिकोड़ते और मुँह बनाते हुये वह बोला ‘‘ तुम्हारे कपड़े और तुम बहुत गंदे दिख रहे हो, तुम्हे अपने नाव में बिठा कर , मैं उसे गंदा नहीं कर सकता “।

 

घमंड के ठीक पीछेे नफरत आ रही थी, प्यार ने उससे भी मदद माँगते हुये ” मेरी नाव खराब हो गई है , आप मुझे अपने नाव मे लेे जा सकतेे हैैं ? ”
‘‘ मैंने जाति-धर्म , रंग-रूप , छोेटा-बड़ा , अमीर-गरीब आदि भेदभाव फैला कर नफरत पैदा की और जहाँ तुम आ जातेे हो, वहाँ नफरत खत्म होे जाती हैै,

तुम मेेेरे अस्तित्व को मिटाना चाहते हो , इसलिए मैं तुम्हे अपने नाव में नही ले जा सकती “।
फिर वहाँ से खुशी निकली, प्यार ने उसेे आबाज दी पर खुशी अपनेे आप मे मग्न थी , उसने प्यार की तरफ देखा भी नहीेें और वहाँ से गुजर गई ।

 

 

इसके बाद दुख आया , प्यार ने उससे भी मदद माँगी,  पर दुखी भाव से दुख बोला ‘‘ मैं पहले से ही बहुत दुखी हूँ , मुझे अकेेला रहना पसंद है ।

और दुख भी आगे बड़ गया ।

 

दुख के बाद समृद्धि वहाँ से गुजरी , प्यार ने उससे भी उसके नाव में बैठने की मदद माँगी।

तो समृद्धि ने जबाव दिया ‘‘ मेरी नाव पर पहले सेे ही इतना धन है ,कि तुम्हारे बैठने के लिए मेरे नाव में कोई जगह नहीं हैै। ”
हार मान कर, निराश होकर, प्यार बैठ गय ,तभी एक नाव वहाँ आकर रूकी औैर उसमें से किसी नेे आवाज लगाई ‘‘ प्यार ! आ  जाओ हमारी नाव पर ,हम तुम्हे बचानेे आये हैं, जल्दी आओ प्यार ! ”
प्यार बिना कुछ कहेे, बिना कुछ सोचे समझे उस नाव में बैठ गया ।love-3

सुरक्षित स्थान पर पहुँचने केे बाद ‘‘ धन्यवाद ! आपनेे मेरी रक्षा की प्यार ने उसका धन्यवाद किया और विन्रमता से पूछा

‘‘ आप कौन है और जब कोई भी मेरी सहायता करने के लिए तैयार नहीं था फिर आपने मेेरी सहायता क्यों की ”

‘‘ मैं समय हूँ और ज्ञान के आदेशानुसार,ज्ञान की नाव लेकर मैं तुम्हे बचानेे आया हूँ ”

” पर ज्ञान मुझे क्यों बचाना चाहता है ”

‘‘ क्योंकि ज्ञान तुम्हारी महानता और महत्व को समझता हैै । वह तुम्हे खुद से भी ज्यादा महत्वपूर्ण और महान मानता हैै । ‘‘

सदियों से प्यार संघर्ष करता आ रहा हैै,उसे अपमानित होना पड़ता है ,

उसे बहुत परेशान किया जाता है , पर अंत मे जीत हमेशा सच्चे प्यार की होती ।

औैर ज्ञान उसका हमेशा मार्गदर्शन करता आया है ।  उचित समय पर ,समय उसकी मदद करने आ जाता हैै ।

जिनके ह्र्रदय मेे सच्चा और निस्वार्थ प्रेम है ,उनके जीवन मे हजारों मुश्किलें आ सकती हैं , पर उन्हेे निराश होनेे की अपेक्षा , अपने लक्ष्य पर ध्यान लगाना चाहिए ।

हो सकता है अधिकतर लोग उनका विरोेध करे (उनके अपने भी विरोध कर सकते हैं) पर ज्ञानी लोेग जरूर उनकी मदद करेंगें ।

 

Posted by

      Dilip Kushwaha522068_123852357808819_1697914864_n

Dilip is currently pursuing Engineering (B.E. mechanical branch, 2nd year) from SDBCE (Bansal ) college Indore
We all thanks to Dilip Ji for sharing his story with LIVEPATHSHALA , and wishing him all the best wishes for his bright future.

Note :- this story is not written by Dilip, he has read it from somewhere.

share your thoughts

comments