प्यार और मोहब्बत का सफर

प्यार और मोहब्बत का सफर, इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि प्यार कैसे होता है ? फिर भावनाये गहरी होती जाती है तो प्यार मोहब्बत का रूप कैसे ले लेता है ।

प्यार एक ऐसी आन्तरिक अनुभूति है, जो हमारे अंदर बाह स्वरूप को देखकर उत्पन्न होती है अर्थात प्यार को हम किसी भी जीव, वस्तु या द्रव ( पदार्थ ) को देखकर महसूस करते हैं।
love-2प्यार की फीलिंग्स मनुष्य या जीव के अंदर बाहरी आकृति या स्वरूप को देखकर उत्पन्न होती है और फिर वह स्वरूप या आकृति उस जीव या मनुष्य का ध्यान अपनी ओर आर्कषित करती है।

तब मनुष्य या जीव में उस स्वरूप के प्रति अपने स्वभाव में परिवर्तन होता है, और उसके दिल में प्यार का बीज उगने लगता है।
फिर वह मनुष्य हर जगह, हर समय, उसी को देखना चाहता है, जिससे उसे प्यार हुआ है और उसका प्यार बढ़ने लगता है।
फिर जब किसी कारण वह अपने प्यार को नहीं देख पाता है, और जब प्यार में दूरियां होती हैं तब प्यार और अधिक बढ़ने लगता है क्योंकि दूरियां होने से उसको देखने की इच्छा बढ़ जाती है ,

प्यार अधिकतर मामलों में आँखों से होता है क्योंकि कोई भी किसी को भी आँखों से ही देखकर उसे पसंद कर दिल में उतारता है अर्थात प्यार आँखों से शुरू होकर दिल में उतरता है।
फिर दिल में प्यार के  भाव उत्पन्न होते हैं।

फिर उन भावों की कल्पना में मनुष्य खोने लगता है और फिर उन काल्पनिक भावों का वास्तिव आंनद लेने के लिए वह अपनी कल्पना को सकारात्मक रूप देने के लिए सोचने  लगता है।
उसमें अपने प्यार को पाने की इच्छा जागृत होने लगती है। बस फिर क्या इसी इच्छा के कारण वह अपने प्यार को हर जगह और हर समय देखना व प्यार के भावों का एहसास करना चाहता है।

उसकी नजरें हर वक्त अपने प्यार को ढॅूढने लगती हैं, उसकी यही नजर हर किसी की नजरों में आ जाती है। फिर बस उसकी नजर में उसका प्यार और वह सबकी नजर में ।
जब उसे अपनी नजर का पता चलता है कि वह सबकी नजर में आ गया है तो वह अपनी भावनाओं पर काबू करने का प्रयत्न करता है और अपने प्यार को भूलने व नजरअंदाज करने की कोशिश करता है।

परंतु अपने प्यार को भूलने की उसकी यह कोशिश कुछ ही समय के लिए होती है और उसे यह एहसास करा देती है कि उसके लिए अपने प्यार से दूर जाना संभव नहीं है।
उसे यह एहसास हो जाता है कि अपने प्यार को पाने में उसे जो परेशानियाॅ आ रही हैं, उसके लिए उन्हें दूर करना अपने प्यार के भावों पर काबू करने की तुलना में आसान है।

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फिर सभी परेशानियों का सामना करके अपने प्यार को पाने की तीव्र इच्छा उसके मन में आने लगती है और उसका प्यार मोहब्बत का रूप ले लेता है।
मोहब्बत अर्थात किसी जीव या प्राणी की किसी को पाने की गहरी इच्छा ,   जिसमें उसे सिर्फ उसको पाने की इच्छा होती है । बस जिससे प्यार हो जाये उसे पाने की इच्छा ही मोहब्बत है ।
मोहब्बत को एक नाम से और जाना जाता है वो है ‘चाहत‘ अर्थात चाहत भी एक इच्छा ही है।
जब व्यक्ति के ह्रदय से प्यार के भाव कभी खत्म नहीं होगें, तो उसकी उसे पाने की इच्छा भी कभी खत्म नहीं होगी अैर उसकी मोहब्बत बढ़ती जाती है।
वह अपनी चाहत से प्यार को पाने के लिए कोई भी असंभव कार्य को संभव बनाने का प्रयास करने लगता है। उसे अपनी चाहत के लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं लगता और वह अपनी इच्छा को और अधिक तीव्र करता चला जाता है।
मोहब्बत भावनाओं की एक ऐसी अदभुत ताकत है जो व्यक्ति से बड़े से बड़ा असंभव कार्य करा डालती है। कई बार मोहब्बत में प्राणी वह कार्य तक कर डालता है जो मनुष्य के लिए कर पाना संभव नहीं माना जाता है, फिर भी वह उस कार्य को करने की कोशिश में लग जाता है, और कर डालता है ।

 

 

written by

Rajesh Hardayal is currntly persuing  M.A. from P.G.  collage Datia (M.P.)
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We all thanks to Rajesh Hardayal  for sharing his article with LIVEPATHSHALA , and wishing him all the best wishes for his bright future.

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