नयनो से गिरते अश्क़…..

नयनो से गिरते अश्क़ हलचल मचवाते हैं
दो पलो की कशमकश को बहलाते है
मन में मस्ती के बाग मुर्झाते हैं
जब अश्क़ जमीन पर आते है
नयनो से गिरते अश्क़…..

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sad girl

अश्क़ो की जन्नत सी बन जाती है
जब पलकों से पलके टकराती है
नयनो का कोई नया जादू शुरू हो जाता है
जब कोई अपने अधरों की शहनाई बजाता है
नयनो से गिरते अश्क़….

रातो के सितारे भी मुस्काते है
चंचल नेत्रो से अश्रुधारा बहाते है
पलकों के कोई लब्ज बन जाते है
जब बिछड़े शक़्सभी मिल जाते है नयनो से
गिरते अश्क़……

 

writtten by            deepesh_converted                                                                                         Deepesh  Kumar  Sharma

Deepesh  Kumar  Sharma is  a  writer (relative to natural lusture)  he is persueing B.Sc. (computer science) from P.M.B.Gujrati Science College Indore (M.P.).  

 

We  thanks to Deepesh  Kumar  Sharma   Ji for sharing his poetry with LIVEPATHSHALA , and wishing him all the best wishes for his bright future.

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