जन-जन की पुकार

जन-जन की पुकार
सुनाई क्यों नहीं देती है, तुझे हम लोगों की चीख ।
एक बार तू डाल दे सितमगर, हमें जीवन की भीख।।
अनजानी राह है, रैन का तम है।
दिल में उम्मीद है, और आँखें ये नम है।।
चेहरे पर खुशी है, दिल में गम है।
झूठ अत्याधिक है जग में, सत्य बहुत कम है।
देंगें दुआयें जीवन भर हम, तू मान हमारी सीख ।।
एक बार तू ………
जन-जन की पुकार
खुशियाँ आयेंगी कभी, अभी गमों का साया है।
संघर्ष ही जिंदगी है, कभी धूप कभी छाया है।।
जीवन जी रहे हैं, सिर्फ आपके सहारे ।
किस्ती मझधार में है हमारी , प्रभु लगा दो किनारे ।।
अंधी हो गयी सरकार प्रदेष की , नहीं रहा उसे कुछ दीख।
एक बार तू…………
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क्या बुरा क्या भला , इस बात से अनजान है।
क्यों छीन लिया तूने, किसानों का सम्मान।।
वायदे निभाना मुश्किल है, और वायदे करना आसान।
जरा सोच लहद के बारे में, चंद लम्हों के बाद तेरा बसेरा शमशान है।।
अब तो जरा डर उस खुदा से, क्यों अभी भी है निर्भीक ।
एक बार तू डाल दे सितमगर, हमें जीवन की भीख। ।।

Written  By-
manoj livepathshala

        Manoj singh Jadaun
Ghurghan/morena (M.P)

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