चल रहा आज भी

चल रहा आज भी,
गांधी जी बंद जिसको कर गये।

livepathshala पर प्रकाशित सभी  hindi poems

जीते जी लड़े बदलाव को,
बदला कुछ नहीं, पर वो गुजर गये।

हाँ बदला है शासन का नाम,
स्वदेशी लुटेरे बने, विदेशी निकर गये।

corrupt-1

सीधे-सीधे बनते थे जो,
जीतते ही चाल उनके बिगड़ गये।।

वादे पे वादे अंबार लगा है,
पर एक-एक वादे पे वो मुकर गये।

ठोकर खाते हैं आम आदमी,
सरकारी कार्यालयों में जिधर गये।।

भ्रष्टाचार की गंदगी है पूरे देश में,
पर घर उनके निखर गये।

हाँ मिटा सकते हैं अपनी एकता से,
पर जात-पात के चक्कर में हम बिखर गये।।

written by

 

ROHIT KUMAR SAHUrohit

 

rohit kumar sahu is currntly persuing BE -(Mechanical) from Govt. Sagar Engineering collage Sagar(M.P.) to know more about him click on his name

We all thanks to Rohit Kumar Sahu for sharing his poetry with LIVEPATHSHALA , and wishing him all the best wishes for his bright future.

 

 

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