कुछ सपने

कुछ सपने…….

कुछ बातें ऐसी हो गई, जो ले गई अरमानों को

ऐसे अरमान जिनमें थे ! कुछ सपने,

livepathshala कुछ सपने

ऐसे सपने जिन सपनों को, मुसिबतों में समेटा था ।

अपने मन की शाखा से, हदय के वृक्ष से लपेटा था !

ऐसी बाधा जिस बाधा में, तैरके हमको जाना था,

उस बाधा की लहरों में, किस्सा नया बनना था ।

ऐसा किस्सा जिस किस्से में,जीवन की कहानी हो

ऐसी कहानी जिस कहानी में,थोडी सी असानी  हो

उस असानी के प्रकाश में, मंजिल का दीप जलाना था !!

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कुछ हवाएं ऐसी चल पडी, जो बुझा गई उस दीपक को

उस दीपक के बुझने पर,दुखों का बोझ उठाना था।

भारी बोझ के साऐ में, नया सफ़र तय करना था।

उस समय के सफर में हमको, मंजिल का पता लगाना था।

ऐसी मंजिल जिस मंजिल का, विरानी जगह ठिकाना था 

सुनसान ठिकाने में भी हमको, हिम्मत को वहां जुटाना था।

जुटाकर अपनी हिम्मत को,  नष्ट किया मुसिबत को

जो ठान रखा था अपने मन में,और पा लिया उस मंजिल को ।।

 

ख़ुशियां  इतनी मिल गई, कि समेट ना पाया ख़ुशियां  को

अपनी ख़ुशियों को भी मैने, बांट दिया उन दुखियों को

वो दुःखी जो जीवन भर तक, पा ना सके उन ख़ुशियों को

दुखियों के भी सुख को देखा, रोक रखा था अंखियों को

अपनी ख़ुशियों  को भी मैंने, बांट दिया उन दुखियों को …………..

अपनी ख़ुशियों  को भी मैंने

बांट दिया उन दुखियों को …………..

 

written by
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शुभम सिंह बिष्ट
We all thanks to शुभम सिंह बिष्ट  for sharing his poetry with LIVEPATHSHALA , and wishing him all the best wishes for his bright future.
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