gazal ajnabi by piyush tiwari

अजनबी ……. ग़ज़ल – पीयूष तिवारी

जिंदगी में मिलते हैं, हर मोड़ पर अजनबी । हर राह पर दृष्टिगोचर हैं, अज़नबी, बस़……. अज़नबी ।। हर मोड़ पर टक्कर हुयी मुझे मिले अजनबी। वो अज़नबी, ये अज़नबी, उनके लिए मैं अज़नबी।। livepathshala पर प्रकाशित सभी कवितायें देखने के लिए hindi poems  पर क्लिक करें । सोचा कि……. किसी एक को मैं बना लूँ अपना । लेकिन था यह मेरा, सिर्फ मेरा सपना ।। मैं चाह था रहा किसी से करना दोस्ती । मैंने एक अजनबी से करली फिर दोस्ती ।। वो अच्छा या बुरा मैं समझ न पाया । मैंने दोस्ती कर पाया था उसका साया ।। बो अज़नबी था – मेरी दोस्त एक लड़की । जिसे देख उस मोड़ पर थी मेरी देह फड़की।। शनैः शनैः मैंने फेंकी थी प्रेम नज़र । उसने भी प्रतिफल में थी दी वही नज़र ।। ह्रदय-रसज्ञता मैं प्राप्त कर न पाया। उसी वक्त मेरी ज़िदगी में था तूफान आया।। था मेरा दोस्त जिसने किया वज्राघात । पीड़ा थी अप्रकृतिस्थ, थी चुभी बार बार ।। समझा था जिसको वो तो दे गयी अघात । मैं यह कैसे भूला कि थी अज़नबी एक साथ। । हर मोड़ दो राहे पर मैं आज फिर से खड़ा हूँ। अपने ही आप में, मैं जाने क्यों टूट चुका हूँ।। की भूल मैंने थी समझा अपना अज़नबी । भूला था मैं कि अज़नबी होता है अज़नबी।। वह लड़की – भगवती प्रसाद कुलश्रेष्ठ जी की रचना पर दिल है कि उसे भुलाता नहींwritten by piyush tiwari       Piyush Ashok Tiwariअगर आपके पास भी हिंदी में कोई आर्टीकल है जो आप livepathshala.com पर पोस्ट करना चाहते हैं। तो आप अपना लेख हमें भेज सकते हैं । पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ पोस्ट करेंगें। आप अपना लेख हमारे पास भेजने के लिए नीचे दी लिंक पर क्लिक करें। Post your article/ अपना लेख हमारे पास भेजने के लिए यहाँ क्लिक करें आपको यह आर्टीकल पसंद आया, तो इसे like, share and comments जरूर करें

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